~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
वर्जीनिया वुल्फ़ के ‘अपना एक कमरा’ में तसलीमा नसरीन
वर्जीनिया वुल्फ़ के ‘अपना एक कमरा’ में तसलीमा नसरीन
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
‘‘मुझे किसी पुरुष से घृणा करने की ज़रूरत नहीं है; वह मुझे चोट नहीं पहुँचा सकता। मुझे किसी पुरुष की खुशामद करने की ज़रूरत नहीं है; उसके पास मुझे देने को कुछ भी नहीं है।’’
- वर्जीनिया वुल्फ़ (अपना एक कमरा)
I तस्लीमा नसरीन I
‘‘मुझे याद है 1990 के दशक में अपने इस्तेमाल के लिए एक अपार्टमेंट किराये पर लेने के लिए मुझे कितना संघर्ष करना पड़ा था। क्योंकि मैं एक औरत हूँ, इसलिए मुझे अकेले रहने की इज़ाज़त नहीं दी जा सकती थी। इसके बावजूद कि मेरे पास पैसा था, लेकिन पुरुष प्रधान समाज ने मुझे एक आत्मनिर्भर, स्वतन्त्र महिला बनने से रोका। आज की दुनिया में एक महिला के लिए पैसा कमाना मुश्किल काम नहीं है, लेकिन समाज में गहराई तक जड़ें जमाए नारी-द्वेषी संस्कृति और परम्परा को तोड़ना आज भी मुश्किल है। साहित्य को आज भी पुरुष का कार्यक्षेत्र मन जाता है। समाज सोचता है अगर महिला को कोई परेशानी है, घर में वह दुखी है तो वह आत्महत्या कर लेती है या वेश्या बन जाती है या लिखना शुरू कर देती है।’’
- तस्लीमा नसरीन 'अपना एक कमरा' के हिन्दी संस्करण की भूमिका में)
वर्जीनिया वुल्फ़ की इस पुस्तक के हिन्दी अनुवाद को पढने के लिए इस लिंक पर जाएँ :http://www.vaniprakashan.in/lpage.php?word=apna+ek
________________________________________________
________________________________________________



No comments:
Post a Comment